M.S.Swaminathan Biography Hindi |एम एस स्वामीनाथन बायोग्राफी

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आज में जिनके बारे में आपको बताने जा रहा हूँ। उन्हें भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है , एम एस स्वामीनाथन भारत के कृषि वैज्ञानिक है इन्होने अपने द्वारा किये गए कार्यो से विज्ञानं एवं तकनीक के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है। आइये जानते है इनके बारे में।

व्यक्तिगत परिचय :

नाम एम एस स्वामीनाथन
पूरा नाम मनकोम्बु संबसिवन स्वामीनाथन
जन्म 7 अगस्त 1925
जन्म स्थान तमिलनाडु के कुम्भकोणम में
पिता एम के सांबशिवन
माता पार्वती तंगशिवन
पत्नी मीना स्वामीनाथन
पुत्री सौम्या स्वामीनाथन
राष्ट्रीयता भारतीय

शिक्षा :

जब स्वामीनाथन छोटे थे तब इनकी पिता का देहांत हो गया था उसके बाद दिन का देखभाल इनके चाचा ने किया इन्होंने अपने हाई स्कूल की पढ़ाई कुंभकोणम के कैथोलिक लिटिल फ्लावर से की, और मात्र 15 साल की उम्र में ही मैट्रिक भी पास कर लिया था । वर्ष 1940 में स्नातक की पढ़ाई के लिए बाद में ये केरल के महाराजा कॉलेज चले गए थे वहां से इन्होंने जूलॉजी Zoology में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री प्राप्त की । इसके बाद इन्होंने एग्रीकल्चर में अपना करियर को चुना।

एग्रीकल्चर में अपने कैरियर को आगे बढ़ाने के लिए इन्होंने मद्रास के एग्रीकल्चर कॉलेज में भी दाखिला लिया और वहां से इन्होंने वेलिडिक्टोरियन में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया उसके बाद इन्हें बैचलर ऑफ साइंस की उपाधि मिली ।

वर्ष 1949 में इन्होंने साइटोजेनेटिक्स मैं पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त की

कैंब्रिज विश्वविद्यालय से 1952 में अनुवांशिकी से पीएचडी की।

कृषि में योगदान :

हमारा देश भारत एक कृषि प्रधान देश है लेकिन 1960 के बाद के वर्षो में जब हमारे देश में अनाज की उत्पत्ति कम हो रही थी तो विशाल जनसंख्या वाले हमारे देश में अनाज का संकट उत्पन्न हो चला था ,ऐसे समय में डॉ स्वामीनाथन ने ज्यादा पैदावार वाली गेहुँ की फसल तैयार की और देश में हरित क्रांति के अग्रदूत बनकर इस समस्या से देश को छुटकारा दिलाया।

इन्होने वर्ष 1966 में मैक्सिको के बीजो को पंजाब के घरेलू किस्म के बीजो के साथ मिश्रित करके अधिक उत्पादन वाले गेहूँ के संकर बीज को विकसित किया था। देश में हरित क्रांति कार्यक्रम के तहत इन संकर बीजो (गेहू व चावल ) को गरीब किसानो के खेतो में लगाया गया। इस क्रांति का सर्वाधिक प्रभाव गेहूँ की फसल पर पड़ा। इस क्रांति ने भारत को खाद्यान की समस्या से उबारकर आत्मनिर्भर बनाया दिया।

कहते है भारत गावों में बसता है और भारत में लाखो को संख्या में गांव है। और यहाँ की अधिकांश जनसँख्या का व्यवसाय कृषि है। इसके बावजूद अनेक वर्षो से यहाँ की जनता खाद्यान और भूखमरी की समस्या से जूझती आयी है। समस्या का समाधान बिर्टिश शासनकाल में भी नहीं हुआ उस समय में भी किसानो को बहुत परेशानी और अत्याचारों का सामना करना पड़ा। देश को अकाल की समस्या का भी सामना करना पड़ा है। इन समस्याओ का कारण देश में सदियों से चले आ रहे कृषि बीजो व उपकरण का इस्तेमाल करना था। उनका समय पर सुधार करने व नयी तकनीक का इस्तेमाल करने पर किसी ने ध्यान न दिया जिस कारण देश को खाद्यान समस्या से जूझना पड़ा।

ऐसे समय में स्वामीनाथन ही पहले व्यक्ति थे जिन्होंने मेक्सिको गेहूँ की किस्म को पहचाना और भारत में खाद्यान की समस्या को दूर करने के लिए उसे अपनाया। इसकी वजह से भारत में गेहूँ की फसल के उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि हुई इसलिए स्वामीनाथन को हरित क्रांति का जनक माना जाता है। इन्ही के प्रयासो से भारत खाद्यान के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है और इस क्षेत्र में निरंतर वृद्धि कर रहा है। वर्तमान में भारत खाद्यान का विदेशो में निर्यात भी का रहा है।

पुरस्कार और सम्मान :

एम एस स्वामीनाथन को विज्ञान और अभियांत्रिकी के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा निम्न पुरस्कार दिए गए ।

  • पद्मश्री – 1967
  • पद्म भूषण – 1972
  • पद्म विभूषण – 1989
  • 1971 – रैमेन मैग्सेस पुरस्कार
  • 1986 – अल्बर्ट आइंस्टीन वर्ल्ड साइंस पुरस्कार
  • 1987 – विश्व खाद्य पुरस्कार
  • 1991 – टाइलर पुरस्कार
  • 1997 – फ्रांस का ‘आर्डर टू मेर्रित एग्री कोल
  • 1999 – यूनेस्को गाँधी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
  • 2003 में बायोस्पेक्ट्रम में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड
  • इन्हे अनेक विश्विद्यलयों ने डॉक्टरेट की उपाधियों से सम्मनित भी किया इसके साथ लंदन की रॉयल सोसाइटी सहित विश्व की कई प्रमुख विज्ञानं परिषदों ने स्वामीनाथन को अपना मानद सदस्य चुना है।

एम एस स्वामीनाथन शोध केंद्र MS Swaminathan Research Foundation :

एम एस स्वामीनाथन ने 1990 के प्रारम्भिक वर्षो में कृषि तथा ग्रामीण विकास के लिए चेन्नई Chennai में एक एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की।

अन्य तथ्य :

एम एस स्वामीनाथन 1972 से 1979 तक भरतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् के महानिदेशक रहे। 1999 में टाइम पत्रिका ने उन्हें 20 वी सदी सबसे प्रभावी 200 एशियाई व्यक्तियों मकी सूचि में स्थान दिया।

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2 –  प्रणव मुखर्जी बायोग्राफी :


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