गिलोय के फायदे क्या है | Giloy Benefits in hindi

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गिलोय Giloy एक औषिधि पौधा है , जिसमें औषिधि गुण प्रचुर मात्रा में विद्यमान है। इसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कार्डिफ़ोलिया है । इसका वर्णन प्राचीन वैदिक साहित्य में भी मिलता है , इसका पता पान के पत्ते के भांति होता है जो कि बहुत ही मखमली होता है । इसकी बेल कुंडलाकार होती है , यदि इसे किसी स्थान पर लगा दिया जाए तो कुछ समय पश्चात इसकी बेल बहुत दूर तक फैल जाती है । इसकी बेल जंगलों पहाड़ों आदि स्थानों पर देखने को मिलती है , किंतु जब से इसका इसका प्रचार प्रसार किया गया तब से इसे लोगों द्वारा अपने घरों पर गमलों में लगाना शुरू कर दिया गया है।

वर्तमान समय हम सबके लिए बहुत ही नाजुक समय है , क्योंकि पूरे भारत और विश्व में कोरोना वायरस जैसी गंभीर महामारी फैली हुई है ऐसे में हम सभी चाहते हैं कि इस बीमारी से कैसे खुद को बचाये तो इसके लिए हम गिलोय का जूस और उसकी पत्ती तना और गोलियां का सेवन कर सकते हैं और इसके नियमित सेवन से हमारा इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ जाता है ,यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है ,अगर हम गिलोय के जूस का सेवन लगातार करते रहते हैं तो हमारा इम्युनिटी सिस्टम अच्छा हो जाता है

गिलोय Giloy के अन्य नाम 

आयुर्वेद में गिलोय को कई नामों से जाना जाता है यथा अमृता , गुडुची चक्रांगी , छिन्नरुहा आदि। यह अपने अमृत के समान गुणों के कारण इसका एक नाम अमृता भी है।

गिलोय के फायदे (Benefits of Giloy)

  • गिलोय बुखार के लिए रामबाण है ,ये डेंगू बुखार को ठीक करता है डेंगू में व्यक्ति की प्लेटलेटस बहुत तेजी से कम होने लगती है। गिलोय के सेवन से इसे कम होने से रोका जा सकता है।
  • हड्डियों के दर्द को भी यह ठीक करता है। 
  • इसका इस्तेमाल सर्दी ,जुखाम और एलर्जी को ठीक करने में किया जाता है। 
  • गिलोय में एंटीऑक्सीडेंट्स पाया जाता है। 
  • गिलोय में प्राकृतिक रूप में जिंक मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे तत्व पाए जाते हैं,जो की हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते है। 
  • इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। 
  • मधुमेह के रोग में इसका सेवन लाभप्रद है। 
  •  यह पाचन क्रिया को भी दुरुस्त करता है और Blood presure ( रक्तचाप ) को भी ठीक करता है। 
  • इसका सेवन नियमित रूप से करने से त्वचा संबंधी रोगों के निदान में सहायता मिलती है। 

गिलोय का इस्तेमाल कैसे करे :

गिलोय की बेल शुरुवात में पतली व मुलायम होती है , परन्तु जैसे जैसे यह पुरानी होती जाती है यह कठोर हो जाती है।इसकी बेल के अंदर चिकनाई होती है और इसका स्वाद प्रारंभ में कड़वा परन्तु बाद में हलक मीठा होने लगता है।

  • इसके पत्ते और तने को सूखाकर इनका पाउडर बना कर इसका सेवन किया जा सकता है। 
  • मौसम के परिवर्तन के साथ बच्चों को बुखार जैसी समस्याओ से गुजरना पड़ता है। यदि ऐसे में आप गिलोय को उन्हें दे तो वे बुखार से जल्दी ठीक हो सकते है। 
  • बच्चो को यदि इसका सेवन करने में कड़वा लगे तो आप इसे काढ़ा बनाकर और उसमे शहद मिलकर दे सकते है । इसके पत्तो को उबालकर आप इसे ग्रीन टी के रूप में ले सकते है। 
  • इसके कोमल  तने को छोटे -छोटे टुकड़ो में काटकर उसे मुँह में डालकर धीरे -धीरे इसे चबाते रहे ,यह एक अच्छा तरीका है इसका सेवन करने का।
  • इसकी गोलियाँ बाजार में आसानी से उपलब्ध है आप किसी भी आयर्वेदिक स्टोर से इसे ले सकते है । 

अन्य इस्तेमाल :

गावों में इसका इस्तेमाल दुधारू पशुओ के चारे के रूप में किया जाता है , जिससे उनमे दुग्ध उत्पादन की क्षमता बढ़ती है। 

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