ओलंपिक में भारतीय हॉकी का इतिहास | Indian Hockey 🏑History In Olympic hindi

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भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी HOCKEY है लेकिन हॉकी का यह दुर्भाग्य रहा है कि राष्ट्रीय खेल होने के बावजूद हॉकी को भारत में कम देखा और पसंद किया जाता है। बता दे कि हॉकी का अपना एक स्वर्णिम इतिहास रह चुका है , जिसके नायक हॉकी के जादूगर और दद्दा कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद थे। इनके नेतृत्व में भारतीय हॉकी अपने सर्वोच्च स्थान पर थी । भारत ने 1928 से लेकर 1936 के बर्लिन ओलिंपिक में लगातार तीन स्वर्ण पदक अपने नाम करके स्वर्णिम हैट्रिक का कीर्तिमान स्थापित किया। बर्लिन ओलिंपिक में मेजर ध्यानचंद भारतीय टीम के कप्तान थे । इसके बाद भी भारत ने 1956 के मेलबर्न ओलिंपिक तक लगातार 6 स्वर्ण पदक अपने नाम किया । भारत ने अपना अंतिम ओलिंपिक स्वर्ण पदक 1980 के मास्को ओलिंपिक में जीता था , तब से लेकर आज तक भारत हॉकी में कोई पदक नहीं जीत पाया था , लेकिन टोक्यो ओलिंपिक 2021 में अपना 41 साल का सूखा खत्म करते हुए भारत ने जर्मनी को 5-4 से हराते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया ।

भारत ने ओलंपिक में अब तक 12 पदक जीते हैं जिनमें आठ स्वर्ण एक रजत और तीन कांस्य पदक हैं। जिनमें अंतिम पदक 2021 के टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता है। आइये जानते हैं भारतीय हॉकी के इतिहास के बारे में विस्तार से

ओलंपिक में भारत का सफर :

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1 – 1928 एम्सटर्डम ओलंपिक :

वर्ष 1928 में ब्रिटिश समय में ओलंपिक खेलों का आयोजन नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम में किया गया था , जहां भारत ने नीदरलैंड को फाइनल में 3-2 से हराकर पहली बार हॉकी का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस ओलंपिक में भारतीय टीम को मेजर ध्यानचंद के रूप में एक नया सितारा मिला। जिन्होंने इस ओलंपिक में 14 गोल दागे थे।

2 –1932 लॉस एंजिल्स ओलंपिक :

1932 में हुए अमेरिका के लॉस एंजिलिस में हुए ओलंपिक में केवल तीन टीमें भारत अमेरिका और जापान थी। जिसमें भारत ने फाइनल जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

3 – 1936 बर्लिन ओलंपिक :

1936 के ओलंपिक जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित किए गए थे। जिसमें भारतीय हॉकी की कमान मेजर ध्यानचंद को दी गई थी इस ओलंपिक में भारत ने जर्मनी को 8-1 से हराकर लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था।

4 – 1948 लंदन ओलंपिक :

1948 के लंदन ओलंपिक आजाद भारत का पहला ओलंपिक था . जिसमें भारत ने ब्रिटेन को 4-0 से हराकर लगातार चौथी बार ओलंपिक में गोल्ड जीता था। इस ओलंपिक में बलबीर सिंह सीनियर के रूप में भारत को एक नया सितारा मिला।

5 -1952 हेलसिंकी ओलंपिक :

वर्ष 1952 के ओलंपिक फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में आयोजित किए गए थे । इस ओलंपिक में भारत फिर से चैंपियन बना भारत ने नीदरलैंड को हराकर स्वर्ण पदक जीता । फाइनल में हुए इस मुकाबले में भारत ने कुल 13 गोल किये , जिसमे 9 गोल अकेले बलबीर सिंह सीनियर ने किये। ऐसा करके बलबीर सिंह सीनियर ने फाइनल में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।

6 – 1956 मेलबर्न ओलंपिक :

यह ओलंपिक ऑस्ट्रेलिया में आयोजित किए गए थे जहां फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को फाइनल में एक गोल से हराकर लगातार छठी बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था।

7 – 1960 रोम ओलंपिक :

इटली की राजधानी रोम ओलंपिक में भारत अपना सातवा स्वर्ण पदक जीतने में नाकामयाब हुआ। फाइनल मुकाबले में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान आमने सामने थे , जिसमें पाकिस्तान ने बाजी मारते हुए भारत को एक गोल से हराकर स्वर्ण पदक जीता और भारत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

8 – 1964 टोक्यो ओलंपिक :

टोक्यो में हुए इस ओलंपिक में भारत ने रोम ओलंपिक में हुई हार का पाकिस्तान से बदला लेते हुए फाइनल में पाकिस्तान को हराकर एक बार फिर ओलंपिक में अपना स्वर्णिम इतिहास लिखा।

9 -1968 मेक्सिको ओलंपिक :

मेक्सिको ओलंपिक में भारत ओलंपिक के इतिहास में पहली बार फाइनल में जगह बनाने में नाकामयाब हुआ और सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद भारत को कांस्य पदक मिला।

10 – 1972 म्यूनिख ओलंपिक :

इस ओलंपिक में भारत को सेमीफाइनल में पाकिस्तान से हार मिली लेकिन प्लेऑफ में नीदरलैंड को 2-1 से हराकर भारत ने कांस्य पदक जीता।

11 – 1976 मांट्रियल ओलंपिक :

मांट्रियल ओलंपिक में पहली बार एस्ट्रो टर्फ का इस्तेमाल किया गया था। एस्ट्रो टर्फ एक ऐसा मैदान होता है जो पूरी तरह से समतल होता है और जिसमें कृत्रिम घास का इस्तेमाल किया जाता है जो खेल के दौरान उखड़ती नहीं है। इस ओलंपिक में भारत ग्रुप चरण में दूसरे स्थान पर रहा और ओलंपिक के 58 साल के इतिहास में पहली बार पदक की दौड़ से बाहर होते हुए सातवें स्थान प्राप्त किया।

12 – 1980 मॉस्को ओलंपिक :

मॉस्को ओलंपिक में 9 टीमों के बहिष्कार के बाद ओलंपिक में सिर्फ 6 टीमों ने प्रतिभाग किया। इस ओलिंपिक में भारत ने स्पेन को 4-3 से हराते हुए ओलिंपिक में अपना आठवाँ स्वर्ण पदक जीता ।

13 – 1984 लॉस एंजेलिस ओलंपिक :

इस ओलिंपिक में भारत पदक की दौड़ में बहार होते हुए 12 टीमों में पांचवे स्थान पर रहा ।

14 – 1988 सियोल ओलंपिक :

इस ओलंपिक में भारत के कप्तान परगट सिंह थे , भारतीय टीम ने इस ओलंपिक में अपना औसत प्रदर्शन किया और पाकिस्तान से क्वालिफिकेशन मैच में हारकर भारत छठे स्थान पर रहा।

13 – 1992 बार्सिलोना ओलंपिक :

इस ओलंपिक में भी भारत को निराशा हाथ लगी और भारत ने केवल 2 मैचों में जीत हासिल की भारत इस ओलंपिक में सातवें स्थान पर था।

14 – 1996 अटलांटा ओलंपिक :

इस ओलंपिक में भी भारत को निराशा हाथ लगी और भारत का प्रदर्शन लगातार नीचे गिरते हुए भारत आठवीं स्थान पर रहा।

15 – 2000 सिडनी ओलंपिक :

सिडनी ओलंपिक भी भारत के लिए कुछ खास नहीं रहा और भारत पदक की दौड़ से बाहर होते हुए सातवें स्थान पर था।

16 – 2004 एथेंस ओलंपिक :

एथेंस ओलंपिक मैं भी भारत का प्रदर्शन लगातार गिरता गया और भारत ग्रुप चरण में चौथे और कुछ सातवें स्थान पर रहा है।

17 – 2008 बीजिंग ओलंपिक :

भारतीय हॉकी के इतिहास का यह ओलंपिक सबसे खराब रहा था , क्योंकि भारत इस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया चिली की राजधानी सेंटियागो में हुए क्वालीफायर मुकाबले में ब्रिटेन से हारकर भारतीय टीम ओलंपिक के 88 साल के इतिहास में पहली बार ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थी।

18 – 2012 लंदन ओलंपिक :

लंदन ओलंपिक में भारतीय टीम हॉकी टीम एक भी मैच जीत नहीं पाई और ओलंपिक में पहली बार आखिरी स्थान पर रही।

19 – 2016 रियो ओलंपिक :

ब्राजील के सबसे बड़े शहर रियो डी जेनेरो में हुए इस ओलंपिक में भी भारत के हाथ कोई पदक नहीं लगा और भारतीय हॉकी टीम क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम से हारकर आठवें स्थान पर रही।

20 – 2020-21 टोक्यो ओलंपिक :

यह ओलंपिक 2020 में जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित किए जाने थे लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह ओलंपिक 1 वर्ष आगे बढ़ाते हुए 2021 में आयोजित किए गए। इस ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह से थे जिनकी अगुवाई में भारतीय टीम ने तीन बार के चैंपियन जर्मनी को 5-4 से हराकर एक 41 साल बाद ओलंपिक में पदक जीता। भारत ने इस ओलंपिक में कांस्य पदक जीता।

भारतीय हॉकी टीम का टोक्यो ओलंपिक 2021 का सफर :

टोक्यो ओलंपिक में इस बार 12 टीमों ने प्रतिभाग किया था । भारतीय टीम ने अपने ओलंपिक अभियान की शुरुआत न्यूजीलैंड की टीम से की थी जिसमें भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 2-1 से हराकर जीत हासिल की। इसके बाद हुए अगले मैच में भारत का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के साथ था जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 5 -1 के बड़े अंतर से हरा दिया।

ऑस्ट्रेलिया से मिली हार के बाद भारतीय टीम का मुकाबला स्पेन से था । जिसमें भारतीय टीम मनप्रीत सिंह की अगुवाई में एकजुट होकर खेली और स्पेन को 3-0 से हराकर जीत हासिल की। स्पेन के खिलाफ मिली धमाकेदार जीत से भारतीय हॉकी टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ चुका था और उसका अगला मुकाबला विश्व चैंपियन अर्जेंटीना से था , अर्जेंटीना से हुए इस मुकाबले में भारत ने अर्जेंटीना को 3-1 से हराते हुए क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।

क्वार्टर फाइनल में भारत का मुकाबला ग्रेट ब्रिटेन से था , जिसमें भारत ने ग्रेट ब्रिटेन को 3-1 से हराया । ग्रेट ब्रिटेन को हराने के बाद भारत का अगला मुकाबला कांस्य पदक के लिए जर्मनी से था जिसमें भारतीय हॉकी टीम ने दमदार प्रदर्शन किया और पहले क्वार्टर में पिछड़ने के बाद भी जर्मनी को 5-4 से हराते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया । यह भारत की 1980 के मास्को ओलंपिक के बाद पहली जीत थी।

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियो के नाम :

1 – मनप्रीत सिंह ( कप्तान )
2 – पीआर श्रीजेश ( गोलकीपर )
3 – हरमनप्रीत सिंह
4 -रुपिंदर पाल सिंह
5 – सुरेदर कुमार
6 – अमित रोहिदास
7 – वीरेंद्र लकरा
8 – हार्दिक सिंह
9 – नीलकांत शर्मा
10 – विवेक सागर
11 – सुमित बाल्मीकि
12 – शमशेर सिंह
13 – गुरजंत सिंह
14 – मनदीप सिंह
15 – ललित उपाध्याय

भारतीय हॉकी टीम के वर्तमान कोच :

भारतीय हॉकी टीम के वर्तमान कोच ग्राहम रीड है । जो मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया के हैं।

FAQ :

Q : भारतीय हॉकी टीम के कप्तान कौन है ?

ANS : मनप्रीत सिंह

Q : भारतीय हॉकी टीम के कोच कौन है ?

ANS : ग्राहम रीड

Q : हॉकी इंडिया के अध्यक्ष कौन है ?

ANS : मोहम्मद मुस्ताक अहमद

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